नाँव एक विचार की

नाँव एक विचार की
और लय पतवार सी
ऐसी कोई रचना हो
जीवन धारा पर बहती …

नाँव एक विचार की
और लय पतवार सी
ऐसी कोई रचना हो
जीवन धारा पर बहती

अनहद से भरी हुई
शब्दों से जुड़ी हुई
ऐसी कोई रचना हो
जीवन धारा पर बहती

नभ मण्डल में

नभ मण्डल में बड़ी छटा सी
पंख खोल कर उड़ान भरती
ईश्वर के वाहन का वैभव
उसके अंतस में पलता है …

नभ मण्डल में बड़ी छटा सी
पंख खोल कर उड़ान भरती
ईश्वर के वाहन का वैभव
उसके अंतस में पलता है

एकल जीवन बीच सभी के
दिशाहीन सी लगती तो है
आज वही करना है जो वह
कह दें उसी दिशा मुड़ना है
क्या बन जाए पता नहीं है
बस विश्वास दीप जलता है

उठ चल दिन आरम्भ करें फिर
देखें इस दिन क्या घटता है
ईश्वर के वाहन का वैभव
मेरे अंतस में पलता है

अदृश्य दृश्य

मेरे प्यारे डिजिटल जगत के लिए, उन दो अंक के लिए जिसके बलबूते पर यह सारा डिजिटल जगत चलता है –

मेरे प्यारे डिजिटल जगत के लिए –

नम्बर कई मिले
मिलनाम्बर में
उनमें थे
न कोई गिले
पर बचे
शून्य एक
ही रहे
अदृश्य दृश्य
से सब बने
नम्बर कई
फिर मिल गए

~ वाणी मुरारका

मिलनाम्बर: मिलन का अम्बर – अर्थात इन्टरनेट

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चित्र सौजन्य: pixabay.com

शिव तुमको ही अर्पित हूँ –

शिव तुमको ही अर्पित हूँ मासूम सुमन भोली सी …
अब ब्लॉग जगत में अपनी हिंदी रचनाएँ भी पेश कर रही हूँ, इस कृति से शुरुआत करके

शिव तुमको ही अर्पित हूँ मासूम सुमन भोली सी
ब्रह्मांगन में तेरे अब मां खेलूं मैं हिरणी सी

श्री-उपहार नए जीवन का, प्रेम-सुधा वरदान
उर में सतरंगी सुख लाया तेरा वीर्य महान

मधु-कली सी वाणी मेरी हरित करे जन मन को
वसुन्धरा पर माँ अब तेरे दे दूँ मैं तन मन को

तेरा हाथ पकड़ चलना है ओ मेरे रखवारे
पथ आलोकित करते चलना सत्-करुणा उर वारे

~ वाणी मुरारका

brahmaangan

ब्रह्मांगन में तेरे अब मां खेलूं मैं हिरणी सी