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जो तुम तोरौ राम, मैं नहिं तोरौं,
तुम सो तोरि कवन संग जोरौं॥
तीरथ बरत न करौं अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल को भरोसा॥
जहँ जहँ जावों तुम्हरी पूजा, तुम सा देव और नहिं दूजा॥
मैं अपनो मन हरि सों जोर्यो, हरि सो जारि सवन सों तोर्यो॥
सबहीं पहर तुम्हरी आसा, मन क्रम बचन कहै 'रैदासा'॥

- रैदास

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